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कुंडली के अष्टम भाव में दशमेश का प्रभाव

कुंडली के अष्टम भाव में दशमेश का प्रभाव

1)कुंडली के अष्टम भाव में दशमेश का प्रभाव जानने के लिए सर्वप्रथम हम अष्टम भाव और दशम भाव के नैसर्गिक कारक के संदर्भ में जानकारी प्राप्त करते हैं। अष्टम भाव का स्वामी स्वयं के भाव से तृतीय स्थान में स्थित है, अतः प्रथम भाव के स्वामी का तृतीय भाव में क्या फल होता है, हम इसके बारे में भी जानकारी प्राप्त करते हैं।

2) अष्टम भाव और दशम भाव एक दूसरे से त्रि एकादश संबंध बनाते हैं। त्रि एकादश संबंध शुभ संबंध माना जाता है, लेकिन अष्टम भाव एक दु:स्थान है। अतः अष्टम भाव का स्वामी दशम भाव में शुभ नहीं माना जा सकता है, क्योंकि अष्टम भाव का स्वामी दशम भाव में जातक की जीविका में विभिन्न प्रकार की परेशानी उत्पन्न करता है। अष्टम भाव का स्वामी दशम भाव में स्थित हो तब अष्टम भाव के नैसर्गिक कारकत्व में वृद्धि होती है, क्योंकि दशम भाव एक उपचय भाव है। अर्थात अष्टम भाव यानी जो कि जातक के जीवन में विभिन्न प्रकार की बाधाओं और परेशानियों का कारक होता है, वह जातक की कुंडली में बलि हो जाता है। अतः जातक का जीवन या प्रोफेशन परेशानियों से और बाधाओं से भरा रहता है। जातक ऊर्जावान होगा, लेकिन दूसरों की तुलना में जातक को ज्यादा मेहनत करनी पड़ सकती है। यदि दशम भाव अष्टमेश से बुरी तरह पीड़ित हो तब जातक के जीवन में एक परेशानी जाती है और दूसरी परेशानी चालू हो जाती है। जातक को अपने जीवन में अच्छी सफलता नहीं प्राप्त होती है और जातक की सफलता का दर सामान्य से भी कम होता है।

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3) दशम भाव हमारा कर्म स्थान होता है। अष्टम भाव गुप्त या अनैतिक चीजों का कारक होता है। यदि अष्टम भाव का स्वामी दशम भाव में स्थित हो तब जातक अनैतिक या गुप्त कार्यों में लिप्त हो सकता है। जातक अपने प्रोफेशन या व्यापार में भी गोपनीयता बनाकर रखता है। जातक को चोरों से या कानूनी समस्या द्वारा या अचानक होने वाली घटनाओं के कारण अपने प्रोफेशन में या व्यापार में नुकसान उठाना पड़ सकता है। जातक अनैतिक और गैरकानूनी कार्यों के द्वारा सफलता प्राप्त करने की कोशिश करता है। दशम भाव सरकार से भी संबंधित होता है और अष्टम भाव का स्वामी दशम भाव में स्थित है अतः जातक को अपनी बॉस के साथ या प्रशासन के साथ या सरकार के साथ परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। यदि अष्टम भाव का स्वामी दशम भाव में शुभ स्थिति में हो तब, जातक सरकार के लिए गुप्त कार्य कर सकता है या सीक्रेट सर्विसेज मैं नौकरी कर सकता है।

4) दशम भाव सामाजिक प्रतिष्ठा से संबंधित होता है। यदि अष्टम भाव का स्वामी दशम भाव में स्थित हो तब यह जातक के सामाजिक प्रतिष्ठा पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है। जातक बदनामी या अपमान का सामना कर सकता है। जातक की सामाजिक प्रतिष्ठा अच्छी नहीं होती है। जातक समाज को अपने बारे में अच्छे से नहीं समझा सकता है या समाज जातक को अच्छे से समझ नहीं पाती है। अर्थात जातक के चरित्र को लेकर समाज के मध्य एक उलझन लगी रहती है।

5) नवम भाव पिता से संबंधित होता है। अष्टम भाव नवम भाव से द्वादश स्थान अर्थात पिता के लिए शुभ नहीं माना जा सकता है। दशम भाव नवम भाव से द्वितीय स्थान है या कहीं कहीं पिता का भी कारक भाव माना जाता है। यदि अष्टम भाव का स्वामी दशम भाव में स्थित हो पिता के स्वास्थ्य के लिए उत्तम नहीं माना जा सकता है। जातक की पिता की मृत्यु जातक के कम उम्र में ही हो सकती है। जातक को अपने पिता का सुख नहीं मिलता है। जातक को अपने पिता की पैतृक संपत्ति प्राप्त होती है लेकिन जातक के पिता के पैतृक संपत्ति में भी विवाद हो सकता है।

6) यदि अष्टम भाव का स्वामी दशम भाव में स्थित हो तब जातक संकुचित विचारों वाला व्यक्ति होता है। जातक नीच प्रवृत्ति का और घटिया किस्म का व्यक्ति होता है। जातक किसी भी परिस्थिति को अच्छे से नहीं समझ सकता है। यदि अष्टम भाव का स्वामी दशम भाव में शुभ स्थिति में हो तब जातक को किसी भी विषय की गहरी और गुढ़ं जानकारी होती है। जातक अपनी इस खूबी को अपने प्रोफेशनल लाइफ में बखूबी इस्तेमाल करता है। जातक एक अच्छा सट्टेबाज हो सकता है।

7) अष्टम भाव का स्वामी दशम भाव में दशम भाव के स्वामी के साथ स्थित हो तब यह जातक के प्रोफेशनल लाइफ के लिए अच्छी स्थिति नहीं मानी जा सकती है। जातक को अपने जीवन में अच्छी सफलता नहीं प्राप्त होती है। जातक के जीवन में सफलता की दर बहुत कम होती है। जातक अपने प्रोफेशनल लाइफ में अनचाही उतार-चढ़ाव से परेशान रहता है। जातक को सरकार से समस्या हो सकती है। जातक को अपने बॉस से भी समस्या हो सकती है। यदि अष्टमेश दशम भाव में शुभ स्थिति में हो तब जातक को अपने प्रोफेशनल लाइफ में अच्छी सफलता प्राप्त होती है। जातक एक बड़ा सट्टेबाज या स्मगलर हो सकता है।

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